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जताते नहीं हैं लोग

Posted On: 28 Apr, 2012 Others में

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दिल में है किसके क्या? ये जताते नहीं हैं लोग !

होंठों  पे दिल की बात भी,  लाते नहीं हैं लोग !

खुद कुछ ना करें, सबकुछ भगवान से चाहें,

सिर सामने यूं ही तो, झुकाते नहीं हैं लोग !!

पलभर में कष्ट दूर हो, मेहनत ना करनी हो,

बाबा को दान यूं ही,  चढ़ाते नहीं हैं लोग !!

अब दान-धर्म केवल, अवतार को, बाबा को ,

भूखे को तो पानी भी, पिलाते नहीं हैं लोग!!

सुनते नहीं हैं बात जो,  लालच में,  स्वार्थ में,

कहते हैं फिर वो, सच को, बताते नहीं हैं लोग !!

मेहनत, ईमानदारी से, दुशवार  है  जीना,

अब भ्रष्ट, बेईमां को, सताते नहीं हैं लोग !

दर्पण की झाड़–पोंछ में,  बीते तमाम उम्र,

चेहरे की अपने धूल, हटाते नहीं हैं  लोग !

लगते  गले  हैं,  हाथ  मिलाते  तपाक  से,

पर भूलकर भी दिल को, मिलाते नहीं हैं लोग !!

देते हैं दिल  को दर्द,  हाल ‘उनका’ पूँछकर,

उस पर भी कहते‘जानी’, सताते नहीं हैं लोग

दिलमें है किसके क्या, ये जताते नहीं हैं लोग

होंठों पे दिल की बात भी, लाते नहीं हैं लोग !!

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

krishnashri के द्वारा
April 30, 2012

स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .

yogi sarswat के द्वारा
April 30, 2012

दिलमें है किसके क्या, ये जताते नहीं हैं लोग होंठों पे दिल की बात भी, लाते नहीं हैं लोग !! वाह , मनोज कुमार जी ! क्या बात है क्या खूब लिखा है आपने ! बधाई स्वीकार करें !

चन्दन राय के द्वारा
April 30, 2012

मनोज जी , आपकी रचना पढ़कर ऐसा लगता है आपने लोगो के चेहरे बड़ी बारीकी से पढ़े , वाही सुन्दर बारीकियां आपके रचना में भी दिखती है , इक सरल सी मासूमियत लिए हुए

shashibhushan1959 के द्वारा
April 29, 2012

आदरणीय मनोज जी, सादर ! बहुत अच्छे भाव ! कडवी सच्चाई ! इस युग का यथार्थ ! सुन्दर रचना ! हार्दिक बधाई !

nishamittal के द्वारा
April 28, 2012

यथार्थ को व्यक्त करती भाव पूर्ण रचना.बधाई

dineshaastik के द्वारा
April 28, 2012

बहुत ही सुन्दर भाव पूर्ण  अभिव्यक्ति। बधाई…..

April 28, 2012

लोगो की हकीकत को वयां कराती हुई कलम……बहुत अच्छा लगता है. आप जैसे साथियों को सच लिखते हुए देखकर……हार्दिक आभार!


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