आईने के सामने

सामयिक मुद्दे पर लिखी गयी ब्यंगात्मक रचनाएं

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बारी -बारी देश को लूटें ..........

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बारी -बारी देश  को लूटें, बनी रहे  अपनी  जोड़ी।

तू हमरे जीजा के छोड़ा, हम तोहरे जीजा के छोड़ी।

एक सांपनाथ एक नागनाथ, एक अम्बेदकर लोहियावादी,

ई जनता की मजबूरी है, केका  पकड़ी  केका  छोड़ी?

सत्ताहित जो मिले पकड़ लो, दागी भ्रष्ट नहीं कोई,

येदुरप्पा -जूदेव के तू जोड़ा, राजा लालू के हम जोड़ी।

ब्लैकमनी बोफोर्स गरीबी, सेकुलर मंदिर बस नारों में,

सत्ता पाकर के चुप रहना, दौड़े बस जुबान की घोड़ी।

रोटी -पानी  ना  याद आये, जनता को ऐसे भरमायें,

मन्दिर के ताला तू खोला, मस्जिद जाकरके हम तोड़ी।

टू जी- कोयला हम देखेंगे, ताबूत-तहलका तुम देखो,

मिलकर ‘जानी’ बारी बारी, लूटेंगे  हम कौड़ी कौड़ी।

सीबीआई- कैग-कमीशन की, हर जाँच को रद्दी में डालें,

कोर्ट कचहरी जाकर जनता, कितना करेगी भागा दौड़ी?

बारी -बारी देश  को लूटें, बनी रहे  अपनी  जोड़ी।

तू हमरे जीजा के छोड़ा, हम तोहरे जीजा के छोड़ी।



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

May 5, 2014

vastvikta se ot-prot .

jlsingh के द्वारा
May 1, 2014

बहुत सुन्दर समयानुकूल


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